हार्टअटैक आए वृद्ध महिला की चिकित्सक ने 50 हजार रुपए का इंजेक्शन लगाकर बचाई जान - State Media

Thursday, May 21, 2026

हार्टअटैक आए वृद्ध महिला की चिकित्सक ने 50 हजार रुपए का इंजेक्शन लगाकर बचाई जान

  


चकिया। स्टेट मीडिया। पीडीडीयु क्षेत्र के अलीनगर गांव निवासी  सीता देवी पत्नी भग्गू उम्र 65 वर्ष को गुरुवार की सुबह में हार्टअटैक आया था जिसे परिजनों ने आनन फानन में जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में भर्ती कराया। जहां चिकित्सकों ने तत्परता और समय पर मिले इलाज के चलते मरीज का जान बचाई । 

वहीं परिजनों ने बताया कि गुरुवार की सुबह सीता देवी के सीने में तेज दर्द, घबराहट और पसीना आने लगा था जिसे जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया की इमरजेंसी में लेकर आए। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने  जांच कर ईसीजी व अन्य आवश्यक जांच कराए। जिसमें हार्ट अटैक बताया गया। इसके बाद इमरजेंसी में उपलब्ध  49 हजार 50 रुपए कीमत का इंजेक्शन मरीज को लगाया गया। जिससे उनकी जान बच गई। 

जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया के इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा आर आर यादव ने बताया कि अलीनगर गांव की रहने वाली महिला परिजनों द्वारा गंभीर हालत में जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में लाया गया। स्थिति गंभीर  देखते हुए बिना समय गंवाए तत्काल उपचार शुरू किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीज को करीब 49 हजार 50 रुपए रुपये कीमत का टिनेक्टेप्लेज इंजेक्शन लगाया गया। 

उन्होंने बताया कि जिससे दिल की नस में बने थक्के को घोलने में मदद मिलती है। इंजेक्शन देने के बाद मरीज की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा और सीने के दर्द में काफी राहत मिली। तत्पश्चात बेहतर इलाज के बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया है।

इस दौरान इमरजेंसी में डा आर आर यादव, चीफ़  फार्मासिस्ट शाकीर अली,सराफूद्दीन ने मरीज के इलाज में लगे रहे। 


वहीं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डा.आर बी सिंह ने बताया कि मरीज को समय पर अस्पताल न लाया जाता तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी। 

उन्होंने बताया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में हार्ट अटैक से बचाव के लिए 49 हजार 50  रुपए कीमत का इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध है। हार्ट अटैक जैसे मामलों में समय पर इलाज ही सबसे बड़ा जीवन रक्षक उपाय है। 

उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए निशुल्क जीवन रक्षक इंजेक्शन 

जैसे- टेनेक्टेप्लाज और स्ट्रेप्टोकाइनेस  24 घंटे आपातकालीन  सुविधाएं उपलब्ध हैं। विशेष रूप से, राज्य सरकारों द्वारा 40,000 से 50,000 रुपए तक के क्लॉट-बस्टर इंजेक्शन अब जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में पूरी तरह से मुफ्त लगाए जा रहे हैं। 

आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस  108 की सुविधा और 24 घंटे खुला रहने वाला आपातकालीन वार्ड  उपलब्ध होता हैं।

उन्होंने कहा कि गर्मियों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने का मुख्य कारण अत्यधिक गर्मी (हीट वेव) और डिहाइड्रेशन हैं। तापमान बढ़ने पर शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हृदय रोगियों को  हीट स्ट्रेस से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज गर्मी में पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है और ब्लड क्लॉट (थक्का) बनने का खतरा बढ़ जाता है। 

शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए रक्त वाहिकाएं फैलती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव होता है। और दिल को ज्यादा तेजी से पंप करना पड़ता है। 

हार्ट के मरीजों के लिए जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, या ओआर एस का सेवन करते रहें।  तरल पदार्थों को अधिक सेवन करें। चिलचिलाती धूप  में घर से बाहर निकलने न निकले यदि निकलना पड़े, तो हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को ढक कर रखें।खान-पान में भारी, तला-भुना और मसालेदार खाना खाने से बचें। यह पाचन तंत्र और ब्लड सर्कुलेशन पर अतिरिक्त दबाव डालता है,मौसमी फल और हरी सब्जियां अपनी डाइट में शामिल करें।  अपनी दवाइयों का समय पर सेवन करें। गर्मी के दिनों में अपने ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की नियमित निगरानी करते रहे।अत्यधिक गर्मी में भारी एक्सरसाइज  न करें। यदि व्यायाम करना है, तो सुबह या देर शाम ठंडे वातावरण में करे।शराब और कैफिन युक्त चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक पेय पदार्थों से बचें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी  को बढ़ाते हैं। अगर सीने में भारीपन, तेज दर्द, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, अत्यधिक चक्कर आना, सांस फूलना या अचानक कमजोरी महसूस हो, तो इसे गर्मी की थकान न समझें और तुरंत किसी नजदीकी हास्पिटल जाकर इलाज करायें।

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