चकिया । स्टेट मीडिया । जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में ओपीडी के बाद मरीजों को ईसीजी जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाएं , पुरूष व महिलाओं को ईसीजी जांच बाहर जाकर करानी पड़ती है। फिर डॉक्टर को जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए वापस मरीज जाता है। इसी बीच मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है । मरीज का जान बचाना डॉक्टर का कर्तव्य बनता है । जहां हार्ट का मरिज हो रूटीन या इमरजेंसी की स्थिति हो या महिलाओं का प्रसव से पहले डॉक्टर ईसीजी जांच की सलाह देते हैं। ओपीडी के बाद मरिज इमरजेंशी में तैनात को डॉक्टर से इलाज कराने आता है तो मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर जांच कराने के पर्चे पर लिखते है तो हास्पिटल में उस वक्त व्यवस्था न मिलने कारण मरीजों को बाहर जांच कराना मजबूरी बन जाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि ईसीजी जांच आमतौर पर दिल तक रक्त पहुंचाने वाली वाहिकाओं में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी, नसों के ब्लॉकेज, टिशूज की असामान्य स्थिति, सीने में तेज दर्द या सूजन, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक के लक्षणों और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए की जाती है।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि ओपीडी के बाद जब कोई मरीज का इमरजेंशी होता है तभी इलाज के लिए हास्पिटल जाता है तो इमरजेंशी में तैनात डॉक्टर, फर्माशिष्ट व वार्ड व्वाय द्वारा इलाज और आक्सीजन की व्यवस्था तो मिल जाती है लेकिन, ईसीजी, एक्सरे,अल्ट्रासाउंड,ब्लड जांच पैथालाजी की सुविधा न मिलने से मरीज लाचार विवश हो जाते । जहां बाहर जाकर निजी पैथालाजी डायनोस्टिक सेंटर पर जांच कराने जाये या दूसरे दिन हास्पिटल में ही जांच कराये अगर अगले दिन छूट्टी रहता है तो कई दिन जांच कें बगैर रहना पड़ता है । मरीज का इलाज कराने आये तामिरदार काफी परेशान हो जाते है । इस परिस्थिति मरीज बाहर की जांच कराकर अपना जान बताते है । जांच व्यवस्था न मिलने पर मरीज को अगर वाराणसी रेफर किया जाता है उनके आगे काफी समस्या खड़ा हो जाता है । ऐसी स्थिति मरीज परिजन डॉक्टर से निवेदन कर अपनी इलाज कराता है तो मरीज की समस्या डॉक्टर को झेलनी पड़ती है ।
कहा जाता है डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं लेकिन वर्तमान समय में जाय डॉक्टर को अपमान के सिवा कुछ नहीं मिलता । जिस मरीज का इलाज की जिम्मेदारी लेते हैं उनके की कारण अपमानित होते । इन सबके पिछे एकही कारण होता है। अगर हास्पिटल में 24 घंटे जिस प्रकार इमरजेंशी में मरीजों का इलाज किया जाता है वैसे ही मरीजों का 24 घंटे हास्पिटल में सभी जांचे उपलब्ध हो तो मरीजों न तो भटकना पड़ता, न ही किसी दुसरे हास्पिटल जाना पड़ता और न ही किसी प्रकार की परेशानी होती ।

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